Spring Again | Undercurrent | Songbird | Borrowed Time
Reminiscences from my diary
Monday, Apr 06, 2026
0040 IST
Murugeshpalya, Bangalore
मैंने सबसे अधिक
विरह के गीत
वसंत में लिखे
तुम उन्हें पढ़ो तो ध्यान से पढ़ना
शांत नीर के नीचे पाओगे
कई कई भँवर
मुद्दत हुई, न आम चखा, न कूक सुनी
तुम गुनगुना ही दो कुछ
पुकार लो मेरा नाम ही
फ़ाग की चौखट पर कील गढ़ी थी
मेरी एड़ियाँ लहूलुहान हैं
जाओ, तुम्हें अपने समय उधार दिया
लेकिन कसम तुम्हें अपने पसंद के गीतों की
जब आओ तो साथ लाना
मेरे पतझड़
मेरी टीस
मेरी प्यास
और मेरा नाम