Sunday, 5 April 2026

Spring Again | Undercurrent | Songbird | Borrowed Time

Reminiscences from my diary

Monday, Apr 06, 2026
0040 IST
Murugeshpalya, Bangalore


मैंने सबसे अधिक 
विरह के गीत 
वसंत में लिखे

तुम उन्हें पढ़ो तो ध्यान से पढ़ना  
शांत नीर के नीचे पाओगे 
कई कई भँवर

मुद्दत हुई, न आम चखा, न कूक सुनी 
तुम गुनगुना ही दो कुछ 
पुकार लो मेरा नाम ही 

फ़ाग की चौखट पर कील गढ़ी थी 
मेरी एड़ियाँ लहूलुहान हैं 
जाओ, तुम्हें अपने समय उधार दिया 

लेकिन कसम तुम्हें अपने पसंद के गीतों की 
जब आओ तो साथ लाना 
मेरे पतझड़ 
मेरी टीस 
मेरी प्यास 
और मेरा नाम