Wednesday, 15 April 2026

Bruised blue | Survival instinct | Circling back | Waiting room

Reminiscences from my diary

Apr 15, 2026
Wednesday 2350 IST
Murugeshpalya, Bangalore


विष बैठाया कंठ में
पाया नया नाम 
तुम्हीं बताओ, मृत्युंजय, 
क्या कहें उनको 
मन-वच-काय पर हों जिनके 
नील ही नील 

यह भी भेद बताओ 
कि कोई कैसे सींचे साँस 
जब रखा हो छाती पर 
पूरा का पूरा हिमालय 
क्या कहें उनको जो पहाड़ ढोते- ढोते 
हो जाएँ खुद पहाड़

पत्थर टूटे तो वापस 
नदी में हिलमिल जाता है 
तुम भी तो जब तब 
कैलाश लौट जाते हो 
तो फिर यूँ करो कि कह दो अस्तु और 
हर यायावर को मिल जाए अपना एक घर 

सुनो, एक वर और दो फिर 
कि घर मिले तो घर में मिले 
एक आँगन, एक वट 
एक बेलपत्र, ढेर सारे रुद्राक्ष 
और कभी ऐनक, कभी बिना ऐनक 
मेरी राह तकते टुकुर- टुकुर दो नयन 


Friday, 10 April 2026

Rejection Letter | Empty Chair | Invisible String | Desert Snail 


Reminiscences from my diary

April 11, 2026
Saturday 0230 IST
Murugeshpalya, Bangalore


तुम्हारी हर कुनमुनाहट को
मैंने बेहद तसल्ली से पढ़ा
कई बार पढ़ा, बार-बार पढ़ा   
फिर करीने से काग़ज़ मोड़ा, और  
होंठ की पपड़ियों में अटकी नमी से 
लिफ़ाफ़ा वापिस चिपका दिया 

बड़े कमरे के एक कोने में
रोज़मैरी की गंध लिए 
एक खाली कुर्सी रहती है 
घर की अभिन्न सदस्य सरीखी 
तुम्हारे लिखे सारे ख़तों से 
मेरा घर, मेरा मन और यह कुर्सी  - सब आबाद हैं 

मैंने इंतज़ार किया मौसमों का, चिट्ठियों का भी 
तासीर और तड़प एक ही रही 
मानो मेरे ही रेशे-रेशे से बुनता 
कोई मकड़जाल
अपने ही धागों से सुलझा-सुलझा सा 
अपने ही धागों में उलझा-उलझा सा 

जब-जब तुम्हें लिखने बैठा 
बेतरतीबी बेताल-सी हावी रही 
और एक बेचैनी, जैसे -
आँख में गिर गई हो किरकिरी 
हथेली में भर आयी हो अमावस 
या मचलता हो रीढ़ पर केंचुआ कोई  


Sunday, 5 April 2026

Spring Again | Undercurrent | Songbird | Borrowed Time

Reminiscences from my diary

Monday, Apr 06, 2026
0040 IST
Murugeshpalya, Bangalore


मैंने सबसे अधिक 
विरह के गीत 
वसंत में लिखे

तुम उन्हें पढ़ो तो ध्यान से पढ़ना  
शांत नीर के नीचे पाओगे 
कई कई भँवर

मुद्दत हुई, न आम चखा, न कूक सुनी 
तुम गुनगुना ही दो कुछ 
पुकार लो मेरा नाम ही 

फ़ाग की चौखट पर कील गढ़ी थी 
मेरी एड़ियाँ लहूलुहान हैं 
जाओ, तुम्हें अपने समय उधार दिया 

लेकिन कसम तुम्हें अपने पसंद के गीतों की 
जब आओ तो साथ लाना 
मेरे पतझड़ 
मेरी टीस 
मेरी प्यास 
और मेरा नाम