Tibet Diaries : Day 5
Reminiscences from my diary
June 25, 2026
Thursday, 2300 HKT
Saga, Tibet
हिमालय के विस्तार को देखकर मैं एक बार फिर हैरान हूँ ! भौचक्का, एकदम! कितने रूप, कितने रंग, कितने पैटर्न! कैसे हो पाया होगा! भूगोल और भौतिकी कुछ भी कहे, ब्रह्मांड की माया के बिना संभव नहीं!
बर्फीले हिमालय, बंजर हिमालय, हरे हिमालय, गहरे हरे हिमालय, ऊँचे हिमालय, नीचे हिमालय, नक्काशीदार हिमालय, सूखे हिमालय, गीले हिमालय पर अंत में :
सुंदर हिमालय
एवरेस्ट बेस कैम्प को जाती सीधी सपाट सड़क देखी
ब्रह्नमपुत्र का बचपन देखा
देखी ल्हासा की उदासी
और बहुत सारे याक
ऑक्सीजन का कम होना क्या होता है, पहली बार महसूस किया , अच्छे से महसूस किया! अपूर्वा आंटी ने गले में कपूर की छोटी सी पोटली डाल दी है - उनका कहना है इससे मदद मिलेगी!
४००० मीटर की ऊँचाई पार हो गई है ! कल ४०० किलोमीटर का सफ़र नापना है !
शिव, साथ रहना !