Saturday, 7 February 2026

Delhi 2010

Reminiscences from my diary

February 07, 2026
Saturday 2230 IST
Murugeshpalya, Bangalore


ट्रेन की खिड़की पर टंगी आँखें 
आँखों में टंका दाँत के ऊपर दाँत 

पूस की रात, वसंत की साँझ, 
जेठ की दोपहरी, बरसात की ताक 

सूरज के कभी होने, कभी न होने की कुढ़न 
और रोज़ रात चाँद तक बनते पुल 

सफ़ेद कोट, नीली टोपी, मेट्रो का काँच 
काँच के बाहर पसरा रोमांच 

विष्णु, मृत्युंजय और रंग-बिरंगी रोशनियाँ 
काँधे पर कुछ टिकी, कुछ झूलती नींद  

सिनेमा, संगीत, हिमेश, लता और  
गीता के पाठ 

आसमान में उठते-उड़ते मन
मन में मन-मन भर बौराहट  

उँगलियों में सिमटता अधजगा शहर 
चुटकियों में बीत रहे कई-कई पहर 

कितने सफ़र, कितनी बातें, 
कितने रतजगे, कितने ठहाके 

एक थी दिल्ली २०१०, और
एक था तुम्हारा जन्मदिन