Conspiracies
Reminiscences from my diary
Feb 11, 2026
Wednesday 0130 IST
Murugeshpalya, Bangalore
एक बूँद में कैद समंदर का खारा
करे जतन मेघदूत
मुस्कराये मछलियाँ
गुलमोहर टूटे
पसर जाए बहुत सारा लाल
क्षितिज पार
गले में हिचकी अधमरी हूक
और जुगनू
कमरे में बंद आसमान
कैलेंडर से झड़ती तारीखें
दूब हरी
राह गुमसुम
दरवाज़े के की-होल में गड़ी आँख
जंगल में आग
धीमे-धीमे जलता दिन
धीमे-धीमे सुलगती रात
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