Monday, 5 January 2026

Himalayas yet again!

Reminiscences from my diary

Jan 05, 2026
Monday 2215 IST 
Murugeshpalya, Bangalore


दिन - १ 
कल मैं फिर से रानीखेत में होने वाला हूँ, माँ कालिका का छोटा-सा मंदिर घूम रहा आँखों में।  थोड़ी ख़ुमारी, थोड़ी नींद  ... 

दिन २ 
काठगोदाम आ गया है। बस अब थोड़ी देर में चीड़ दिखने शुरू हो जायेंगे, फिर कैंची धाम की भीड़, फिर और चीड़, और चीड़, और निर्मल की याद। रात ही न हो जाए पहुँचते - पहुँचते  ...

दिन ३ 
मेरे बिस्तर से ही घाटी दिखती है, और उसमें टिमटिमाती, बिखरी-बिखराई रोशनियाँ - यह कितनी सही बात हुई। अच्छा है कमरा, पर तारा की याद अब भी हावी है। साँस में साँस आ रही है। काली माँ मुस्कुरा रही हैं। 

दिन ४ 
खूबसूरत खिड़की, कोसी धूप और मचलती परछाइयों का खेल। एक सीधी - सादी तस्वीर  ... 
शनि, चाँद, कपिला, और गुरु बृहस्पति - जादू, माया, तिलिस्म  ... 

दिन ५ 
देख ही लिया पंत-म्युज़ियम। और उनका घर।  सरकार रेनोवेट कर रही है। नहीं जानता था तीन बातें - उनके जन्म के छः घंटे बाद उनकी माँ का देहांत, उनका आजीवन विवाह न करना, और यह कि इंकलाब बच्चन को अमिताभ बच्चन बनाने का श्रेय पंत जी को जाता है। 

दिन ६ 
बैजनाथ, फिर से  ... बागेश्वर फिर से  ... मुंसियारी पहली बार  ... 
बागेश्वर जैसी जलेबियाँ मिल जाएँ तो कहना  ... 

दिन ७ 
नैना देवी, चारों ओर पसरी सुन्दर धूप, धूप सकते पहाड़, और मैं  ... 
देवराज की बातें, शरारतें, सामने ठन्डे पानी का झरना, और सल्फर के गरम पानी में डूबा मैं  ... 

दिन ८ 
मुंसियारी के गाँव, गोलू देवता को लिखे ख़त, ख़तों को सहेजती हज़ारों-लाखों घंटियाँ, और फिर कसार देवी से मिलना। नहीं जानता था कि स्वामी विवेकानंद ने अपना तेज यहीं पाया था। 
नीचे उतारते हुए अल्मोड़ा घाटी की टिमटिमाहट को एक बार फिर आँखों से पीना  ... 

दिन ९ 
अट्ठारह किलोमीटर की वॉक ! बहुत सुन्दर, खुशनुमा दिन, और तेरह किताबें  ... 

दिन १० 
मझखाली की धूप, पोहे, और किताब  ... 
चन्दन भैया की चाय, बन-मस्का और किताब  ...  
बातुली अका की टिक्की, मोमो, और किताब  ... 
आनंद जी का अल्पाइन, लेमन टी, और किताब  ... 

दिन ११ 
नौ घंटे का सफ़र, मन में मुसमुसाहट, और ढेर सारी अजीबियत। कुछ देर और -  और फिर घर !



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