Saturday, 10 January 2026

Heartlessness

Reminiscences from my diary

Jan 10, 2026
Saturday, 2230 IST
Murugeshpalya, Bangalore

अक्षरधाम से गुज़रती मेट्रो में उठता है 
सबसे ज़्यादा दर्द 
बार-बार, हर बार 

वक़्त भर ही देता होगा 
हर ज़ख्म और हर याद 
दोनों की तासीर एक

पानी से तर यादें
पीड़ से रिसता मवाद  
नमक ही नमक,  चुप ही चुप   

समंदर तबाह, आसमान भी  
लहूलुहान रेशा-रेशा 
बेदर्दों का कुछ नहीं जाता 

No comments:

Post a Comment