Saturday, 16 May 2026

Randomness yet again

Reminiscences from my diary

May 16, 2026
Saturday, 2245 IST
Murugeshpalya, Bangalore


धीमी-सी भोर धीमी-सी शाम, धीमा-सा मैं धीमा-सा जाम 
प्रशांत पाँव पखारता रहा, मैं सोच-सोच बौराता रहा 
अस्त-व्यस्त रही बाल्कनी, बाल्कनी का सारा हरा 
कुछ ख़्वाब-ख़्वाब कुछ आग-आग, बेमौत मर गया एक तारा 
बीत गया समय बहुत, नहीं जाती बावन चिट्ठियों की ख़ुमारी  
एक सौ चालीस सीढ़ियाँ उतरनी हैं एक घर तक पहुँचने के लिए  
माँ अपनी सहेली के साथ देर तक बतियाती रहती चौखट पर 
एक दिन मिल ही जाएगी नास्तिक की प्रार्थना, साथ में ढेर सारा डोपामाइन 
नहीं लिखना था कुछ फिर भी स्वाहा हुआ एक पन्ना सफ़ेद 
इन हालातों में कैसे जाया जायेगा इस्तानबुल

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