Evening blues
Reminiscences from my diary
June 23, 2026
Saturday 2015 IST
Menasi, Doddaballarpur
मैं जहाँ हूँ वहाँ कोई नहीं है
बस
मिट्टी का कच्चा रास्ता है
दोनों ओर टीक के पेड़ हैं
उनसे पाँच पंखुड़ी वाले छोटे-छोटे हज़ारों सफ़ेद फूल झड़ रहे हैं
शाम थक चुकी है
अँधेरा गहराता जा रहा है
स्ट्रीट लाइट या लैंप पोस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है
अभी अभी बरसात शुरू हुई है
गिरती बूँदों की आवाज़ तेज़ होती जा रही है
और
अचानक से
बिल्कुल अचानक से
पूरी पगडंडी जुगनुओं से पट गई है