Wednesday, 15 April 2026

Bruised blue | Survival instinct | Circling back | Waiting room

Reminiscences from my diary

Apr 15, 2026
Wednesday 2350 IST
Murugeshpalya, Bangalore


विष बैठाया कंठ में
पाया नया नाम 
तुम्हीं बताओ, मृत्युंजय, 
क्या कहें उनको 
मन-वच-काय पर हों जिनके 
नील ही नील 

यह भी भेद बताओ 
कि कोई कैसे सींचे साँस 
जब रखा हो छाती पर 
पूरा का पूरा हिमालय 
क्या कहें उनको जो पहाड़ ढोते- ढोते 
हो जाएँ खुद पहाड़

पत्थर टूटे तो वापस 
नदी में हिलमिल जाता है 
तुम भी तो जब तब 
कैलाश लौट जाते हो 
तो फिर यूँ करो कि कह दो अस्तु और 
हर यायावर को मिल जाए अपना एक घर 

सुनो, एक वर और दो फिर 
कि घर मिले तो घर में मिले 
एक आँगन, एक वट 
एक बेलपत्र, ढेर सारे रुद्राक्ष 
और कभी ऐनक, कभी बिना ऐनक 
मेरी राह तकते टुकुर- टुकुर दो नयन 


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