Tibet diaries : Day 3
Reminiscences from my diary
June 23, 2026
Tuesday, 1930 NST
Somewhere near Tibet border
ये सात घंटे मेरी पहाड़ी यात्राओं का शायद सबसे खतरनाक सफ़र रहा होगा। पूरे रास्ते पर, रास्ते के हर इंच पर भूस्खलनों के बाद का मलबा, पत्थर ही पत्थर, और उन पर डोलती बस हमारी। डगमग डगमग! अब गए कि तब गए ! कोई बैरिकेड नहीं, कोई बचाव नहीं, ज़रा सी गाड़ी इधर उधर हुई नहीं कि सीधा त्रिशूली में, अगर बीच की चट्टानों से बच गए तो! और त्रिशूली - लगभग पूरे रास्ते हमारे साथ साथ चलती रही - पूरे वेग के साथ , पूरे शोर के साथ। काठमांडू से २०० किलोमीटर दूर तिब्बत सीमा जाता नेपाल का यह हिस्सा बहुत रस्टिक है। मुझे याद आता रहा कभी कभी मणिकरण, कभी कभी भूटान ..
छोटा सा गाँव है , सादा सा कमरा ! नीचे त्रिशूली , ऊपर प्रार्थनाओं के झंडे ! उनके पीछे बीच बीच में दिखते पद्मसंभव ! सुनहरे रंग के ! कंधे पर त्रिशूल और उसके दंड पर टिके तीन नरमुंड ! ठंडी तेज़ हवा, ठीक ठाक ऊँचाई, बीच बीच में आती मुस्कुराहट, लता मंगेशकर ..
कुछ जन्म और कुछ दिन - बेतरतीब ही रहते हैं ! समझ से परे! कभी दो कविताएँ, या २३ तस्वीरें, कभी २५ अजीबोगरीब उपहार, और कभी तथागत को टुकुर टुकुर ताकते बस एक मंगलकामना ..
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